“आँचल” शब्द स्वयं माँ के ममत्व और उसकी अतुलनीय ममता का प्रतीक है । जैसे कि माँ के ऑँचल में बच्चा निश्चित होकर गहन विश्राम और असीम आनंद का अनुभव करता है, स्वयं को प्रत्येक प्रकार के भय एंव असुरक्षा से रक्षित अनुभव करता है, 'आँचल न्यास' की स्थापना की पृष्ठभूमि में समाज द्वारा परित्यक्त, तिरस्कृत अथवा प्राकृतिक आपदाओं और आतंकी घटनाओं से प्रभावित वंचित जीवन जीने वाले अनेक पूर्वोत्तरीय बच्चों के भावी जीवन को भारतीय संस्कृति के अनुरूप गढ़ने की सद्भावना छिपी हुई थी । इसी उद्देश्य से 'आँचल न्यास' की स्थापना 2007 में की गई थी।
हमारे समाज में कुछ कारणों से कई बालक सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से वंचित हो जाते हैं। अक्सर ऐसे बालकों का मानसिक और शारीरिक शोषण किया जाता है । राष्ट्र विरोधी और असामाजिक तत्वों के द्वारा उनका दुरुपयोग किया जाता है, जिससे उन्हें राष्ट्र विरोधी कार्यों में शामिल किया जा सकता है पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में यह समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। ऐसी सामाजिक और राष्ट्रीय समस्थाओं का समाधान समाज के जागरूक और सेवाभावी व्यक्तियों के सहयोग से हो रहा है, जिन्होंने 'आँचल न्यास' गठित किया है। इसके माध्यम से पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के ऐसे बालकों के पालन-पोषण, संरक्षण और शिक्षा की व्यवस्था की गई है। 'वात्सल्य निलयम' न केवल बच्चों को शिक्षा देता हैं, बल्कि उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के माध्यम से उनके आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देता हैं। इससे उन बच्चों के पास न केवल ज्ञान होता है, बल्कि उन्हें कौशलों का परिचय भी होता है जो उन्हें समृद्धि और स्वायत्तता की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करता हैं।
'वात्सल्य निलयम' एवं आसपास के ग्रामीण अंचल के ऐसे शिशु बालक और बालिकाएं, जिन्हें शिक्षित करने के उद्देश्य से सुमित्रा राजकृपाल शिशु-वाटिका, आँचल न्यास के अधीन कार्यरत, एक महत्वपूर्ण प्रकल्प है । इस प्रकल्प के तहत बच्चों को उनके नैतिक, शैक्षिक, और सामाजिक विकास के लिए एक प्रेरणाख्रोत प्रदान किया जाता है। शिशु-वाटिका के द्वारा प्रदान की जाने वाली देखभाल और मातृत्व की भावना बच्चों को न केवल ज्ञान में बढ़ोतरी करती है, बल्कि उन्हें समाज में उत्तम नागरिक के रूप में समर्पित करने की प्रेरणा भी प्रदान करती है।
“ऑँचल विद्यापीठ' एक भारतीय संस्कृति के मापदण्डों पर आधारित आधुनिक CBSE मान्यता प्राप्त स्कूल है, जिसका विस्तार कक्षा 10+2 तक हो चुका है। स्कूल के प्राधिकृत परिसर में अंदरूनी और बाहरी खेलों के लिए सुविधाएँ हैं, जिसमें शूटिंग रेंज, एडवेंचर पार्क, फुटबॉल, वॉलीबॉल और स्केटिंग आदि शामिल हैं। “आँचल विद्यापीठ' प्रदूषण-मुक्त पर्यावरण में स्थित है और छात्रों को शुद्ध और स्वास्थ्यपूर्ण वातावरण में शिक्षा प्रदान करने का प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य छात्रों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रदूषण को न्यूनतम करके उनके प्रतिभागिता को बढ़ावा देना है।
वानप्रस्थ आश्रम में वंचित, जरुरतमंद व असहाय वृद्ध लोगों की रहने की व्यवस्था की जाती है, यहाँ उनके लिए एक सुरक्षित और सामाजिक वातावरण प्रदान किया जाता है।
'वात्सल्य निलयम' के बालकों के उत्तम शारीरिक विकास और पोषण की दृष्टि से दुग्ध द्रव्यों की उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से आऑँचल न्यास ने एक गौशाला की स्थापना की है। भारतीय संस्कृति में गौ का एक विशिष्ट स्थान है, इस हेतु से गौशाला सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। गौ संरक्षण और गौ संवर्धन को सहयोग किया है। आश्रम और गौशाला की गायों का नामकरण संस्कार एवं गौ-दान संस्कार किया जाता है।